कुल पेज दृश्य

सोमवार, 24 जुलाई 2017


मई 23 
..................
उगना
हरा होना
गिर कर सूख जाना
पत्थर हो जाना
मिट्टी हो जाना
जीना हर शै को
जिंदगी की
मरने से ज्यादा !
........................
दो कदम हमसफर

कोई टिप्पणी नहीं:

ईद मलीदा !

मैं गया था और  लौट आया सकुशल बगैर किसी शारीरिक क्षति और धार्मिक ठेस के  घनी बस्ती की संकरी गलियों की नालियों में कहीं खून का एक कतरा न दिखा ...