एक तारा
फिर टूटा आज !
टूट के तोड़ गया
सारे भरम
रात
सहसा खड़ी देखती रही
टूटना, गुम हो जाना
बीज का
अनंत आकाश में ।
ये बैटरियों ने आज कल नाक में दम कर के रखा हुआ है . पिछले कुछ सालों से ऐसा लगता है जैसे बतेरियाँ ही बदलवा रहा हूँ . कभी धंधे की , कभी घर ...