उड़ने दो , उड़ने दो
बच्चों को उड़ने दो ...
गर नाक अटक जाए
तो भी तो
उड़ने दो ..
जिस ऊर्जा का
संचार प्रवाह
हो उद्दंड
उसको भी
उड़ने दो
कहने को क्या
ले जाएगा
जब राह भटक के
सही गलत का
फैसला खुद कर पायेगा
तब लौटेगा
न लौटे तो भी
उड़ने दो उड़ने
बच्चों को .....
80 50 का हेरा फेरा
लोभ लोक का लेखा जोखा
कंधनी बांधे बेड़ा पार
न पहुचे उस पार
फिर भी उड़ने दो
बच्चों को उड़ने दो ..
बच्चों सा होना
बच्चों में खोना
कठिन है
उनकी ऐसी सोच
वैसी सोच कैसी भी
साझा न करने पाए
तो बच्चों को
बोलने दो !
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