कुल पेज दृश्य

रविवार, 27 नवंबर 2016

मुझे मेरे हिस्से की ...!

रखो
तुम अपने हिस्से के
सुख चैन, सहानुभूति

रखो
तुम अपने हिस्से की
दुनियादारी, दिखावट के सामान

रखो
तुम अपने हिस्से के
प्रेम साहित्य

रखो
तुम अपने हिस्से के
भविष्य सहेज कर

रखो
तुम अपने हिस्से की
नसीहतें, चिंताएं

रखो
तुम अपने हिस्से की
सहन की गाथाएं

मुझे
मेरे हिस्से की
आखरी सांस दे दो



कोई टिप्पणी नहीं:

कौन हो तुम ....

कौन हो तुम  जो समय की खिड़की से झांक कर ओझल हो जाती हो  तुम्हारे जाने के बाद  तुम्हारे ताज़ा निशान  भीनी खुशबू और  गुम हो जाने वाला पता  महस...