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शनिवार, 1 अप्रैल 2017


इंतज़ार 


कुछ यादें
कुछ ख्वाहिशें
कुछ किस्से
और ढेर सारा प्यार
पकाया है

इंतज़ार की मद्धिम आंच में !


कि तुम आओगी एक रोज़
नीली चमकदार आँखों वाली 
बिल्ली की तरह
दबे पाँव
चट कर जाओगी सब !

मैं छिप के देखूंगा
तुम्हारे अघाए हुए मदमस्त
क़दमों को जाते हुए।

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