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शनिवार, 1 अप्रैल 2017


इंतज़ार 


कुछ यादें
कुछ ख्वाहिशें
कुछ किस्से
और ढेर सारा प्यार
पकाया है

इंतज़ार की मद्धिम आंच में !


कि तुम आओगी एक रोज़
नीली चमकदार आँखों वाली 
बिल्ली की तरह
दबे पाँव
चट कर जाओगी सब !

मैं छिप के देखूंगा
तुम्हारे अघाए हुए मदमस्त
क़दमों को जाते हुए।

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कौन हो तुम ....

कौन हो तुम  जो समय की खिड़की से झांक कर ओझल हो जाती हो  तुम्हारे जाने के बाद  तुम्हारे ताज़ा निशान  भीनी खुशबू और  गुम हो जाने वाला पता  महस...