लोहे की चमड़ी
भावुक मन
खुर हो चुके पैर
जानते नहीं पीर
प्रीत की रेत में
तपना खरा होना है।
एक टिप्पणी भेजें
कौन हो तुम जो समय की खिड़की से झांक कर ओझल हो जाती हो तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे ताज़ा निशान भीनी खुशबू और गुम हो जाने वाला पता महस...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें