तुम्हारी छांव की ठंढक
तुम्हारी साँस का जलना
तुम्हारी याद के डैनों में
दराजें उम्र की होना
नज़र से देख भर लेना
कहानी बाल से लिखना
तुम्हारी जिद्द का वो कोना
वफ़ा -ए- हिज़्र में रोना
बने किस चीज़ के तुम
भरा कैसा रसायन
धरा की नाक के नीचे
फले फूले तन मन ।
उड़ने दो , उड़ने दो बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए तो भी तो उड़ने दो .. जिस ऊर्जा का संचार प्रवाह हो उद्दंड उसको भी उड़ने दो कह...
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