कुल पेज दृश्य

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

तुम कौन हो ?


रंग ने रंग से मेल किया 

निखर गए सब रंग 

मौसम , बारिश 

पानी , फसलें 

गए जो देखने संग .



बिंदी  

सफ़ेद बिंदी , लाल बिंदी 

पीली , हरी मैरून बिंदी 

टंगी पानी से छल छलाते 

सख्त ललाट पर 


घने जंगलों के 

ठीक भीतर 

सबसे ऊँची चोटी पर 

एक परिंदा रहता है 


देखने वाले महसूस होते दृश्यों ने 

बराबर की  दूरी रखी 

बोलना शांत हो जाता रहता 

बिंदियों के आकार पर 

न जाने बिंदी चाँद क्यों 

हो जाती है . 


बिंदियाँ रहती हैं 

नहीं होने पर भी 

जैसे चाँद नहीं रहता 

एक दिन . 



सुन्दर वन सी तुम 

डूबती समंदर में 

वन लता तुम कौन 

चढ़ती ऊँचें आकाश में 

पृथ्वी लिए ललाट पर 

तुम्हारी काया 

लिपट जाती है 

हरे से 

नीले से 

सुनहरी किरणों से .

शनिवार, 8 अगस्त 2020

गीत

कोई जो मुझे देखे .... याद ना आए ए ए ए 

कोई जो मुझे रोके .... साथ तो आए 

कोई ज़रा ..

कोई ज़रा ...

कोई ज़रा आ आ 

अकेला हूँ ... चला मैं अकेला 

साथ हैं साथी मिले गा सवेरा ...

बरसता हूँ बन के बादल 

गरजता हूँ बनूँ मैं हलचल 

मैं कागज़ हूँ 

कोई ज़रा 

ज़रा ज़रा .

मंगलवार, 28 जुलाई 2020

बारिश आंसू प्रेम !

बारिश आके जा चुकी
आंसू अब भी अटका

बाढ़ का समाचार 
बादलों में लटका 


साफ आसमान
सोंधी मिट्टी में लिसा तन
तल , ऊपर देखता

हारता जीतता
ड्योढ़ी लांघता दुख
टूटता आंखों से
गिरता बूंद बूंद
गली गलियारों  में

छाती पर कन्धों तक 
खड़ी फसल 
छोड़ती सूत तक ना 
मन लिपट कर 
धरती की छाती से 
पानी पानी होता 

न जाने कहाँ से 
आस  की पौध उगती रहती 
 खरपतवार की तरह  

प्रेम से छल जो जाता है
हर बार कोई
बारिश , आंसू प्रेम बनकर !

सोमवार, 13 जुलाई 2020

अनाम !







मेरी देहरी पर गिरा शख्स
मैं ही था, और कोई नहीं
उठा, झाड़ा और
पार कर गया देहरी !

मेरा दोष था
मैंने ही देहरी
ऊंची रखवाई

खिड़कियों को
दरवाज़ा समझाया
गली कुंचों को फब्तियां
बाहर के भीतर को आंगन

वो जो गिर के
संभला मैं वो नहीं
वो तुम हो !

भरोसे की कतरनों को
सीती तुम
कौन हो ?

रविवार, 12 जुलाई 2020

पानी पढ़ना !







भीतर जब बेचैनी हो
पानी पढ़ना !
झीने कपड़े , फटी निकरिया
पानी पढ़ना !
आसमान से बरसे हर्फ
पानी पढ़ना !

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...