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मंगलवार, 28 जनवरी 2020

टूटना


एक तारा
फिर टूटा आज !
टूट के तोड़ गया
सारे भरम
रात
सहसा खड़ी देखती रही
टूटना, गुम हो जाना
बीज का
अनंत आकाश में ।

शनिवार, 23 नवंबर 2019

वक़्त

देखते रहना सुकून से
वक़्त की चाल
जहाँ बैठे हो बैठे रहो !

कोई चाल चमक जाएगी
पेशानियों पर
झुर्रियों से लहू टपकने लगे
समझ लेना युवा उफान पर है

बोलती और बखानियों में
अंतर कोई ज़्यादा नही
एक उम्र का तकाज़ा
मुट्ठी भर ईमान का।

बड़ों की तितलियों से
कभी कुनबा महकता था
वली की भित्तियों से राह तक
कभी चिमनी का धुवाँ
आम होता था।

उम्र

टेढ़ी रीढ़
सोखता हो चुकी धमनियों का
एक ढांचा
असहमतियों की गुंजाइश को
खारिज़ करता है

इक उम्र झुर्रियों से पहले
चूर हो जाती है
अहम के सारे जीवाणु
पतले होते हैं
पुरानी भित्तियों के साँप
लौटते रहते हैं

असहमति के साथ कुछ दूर
चलना सिखाया नही जा सकता
चलना, चश्मदीद
ही होता है
लिपटे कदमों के निशान
नही मिलते

सहचरों के कदमताल
से लेकर आगे बढ़ जाने तक
ढाँचा कंपित होता है

रोज़ कोरों से रिसते हुए खारों से
फुसफुसी हड्डियों के दर्द से
पिलपिली यादों के दलदल से
भला कौन बच पाया है
जो तुम बचोगे !

तुम ढाँचा हो !
गिर जाओगे ।

देखने को अब बचा ही क्या है
जो तुम देखोगे !

रविवार, 8 सितंबर 2019

जुताई

तके तके
हटे हटे
दाएं बाएं
गूने गूने
मन तन

कुसी धरे
बैलन पर
खेतन मा
टिबबल से
पानी झरे
छन छन !

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

दूरी !

हम मिलते हैं रोज़
सैकड़ों किलोमीटर की थकान
मनों भार लेकर
भिड़ जाते हैं आमने सामने

भिड़ने के बाद
दो दूनी चार
बटे, हँसिल दुनिया
बच जाती है
रोज़
सुबह दोपहर शाम
दूरी कोई दूरी होती है भला !

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...