कुल पेज दृश्य

गुरुवार, 17 नवंबर 2022

अच्छे वक़्त के इंतज़ार में !

नए सिरे से
हफ़्तों, महीनों , सालों  को
लगाना शुरू किया
शीशे की अलमारी में

किताबों को कब  का
खाली कर  दिया
घड़ी की सुईंयों से
बीत चुके की
चुगली न करने की हिदायत
रवायतन दे दी

ग्रहों की दशाओं से
माँगना अब छोड़ दिया

भीतर उफनाई नदी से
ढेर सारा वक़्त ले


दुबक कर बैठा हूँ 
अच्छे वक़्त के इंतज़ार में !

कहानियों का अंत !

कला का पात्र  !

तुम्हारे लिखे में मेरी याद के अलावा कुछ नहीं होता . लिखना कितना जरुरी है यह बात मैंने तुम्ही से जानी .  तुमको अक्सर देखा मैंने रोते हुए . कभी रसोईं में,  कभी छत पर . कभी शाम की चाय पर,  तो  कभी बाज़ार से सब्जियां लाते वक़्त  . तुम कभी कभी हँसते हुए भी रो देती  .
       मैंने जब भी तुम्हारे रोने की वजह पूछी . तुम भटके हुए राही की तरह गहरे मौन में चली जातीं . कोई सुबह चुपके से मेरी झोली में एक कहानी डाल जाती. मैं उन्हें कहानियों के तौर पर पढता. तुम्हारे लिखने के कौशल पर विस्मित  होता. वाह और आह के बीच का वन लाइनर तुम्हे सहृदय प्रस्तुत कर देता . पर तुम्हारा रोना कभी ख़त्म नहीं हुआ , जैसे तुम्हारी कहानियां कभी ख़त्म नहीं होती.
तुमने मेरे भीतर पढने की आदत बोने के लिए कई कहानियाँ लिखीं . मेरी हर एक आदत पर एक किरदार गढ़ा . हर किरदार के इर्द गिर्द एक संसार रचा . उस संसार में तुम्हारे मन की थाह होती. थाह से गहरी होती तुम्हारी उदासी .
हम कहानियों के माध्यम से, परत दर परत खुलते गए. खुलती परतों में हमने पाया कि हम कभी मिले ही नहीं . जो मिले थे वो हम नहीं थे . अब तक !  जब मैंने कुछ कुछ पढना सीख लिया था  . तुम्हारी मोटी कहानियों वाली डायरी भर चुकी थी .
डायरी में दर्ज आखरी कहानी ने तुम्हे बुरी तरह झुलसा  दिया था . तुम्हारे हाँथ कांपते, हृदय गति रुक जाती , कई बार बेसुध पायी जाती तुम . यदि तुम्हे कुछ हो जाता तो !   इस कहानी का  किरदार लम्बे समय तक अटका रहा तुम्हारे गले में, फांस की तरह .  लम्बा सांवला मुस्टंड   , घुंघराले बाल , पकी दाढ़ी, बड़ी बड़ी डरावनी आँखें ......  गिठी  , कोमल, छोटी आँखों में बड़े ख्व़ाब लिए तितली की तरह उसकी प्रेयसी  . उनके बीच ज्वाला बन चुके आक्रांत  प्रेम में कुछ नहीं बचना था  . तुम उस कहानी का सुखान्त चाहती थीं . मार देना चाहती थीं उन दोनों में से किसी एक को .
उस डायरी की आखरी कहानी खूब सराही गयी . तुम्हे कहानीकार कहलाना पसंद नहीं था. इसलिए तुमने लिखना बन्द कर दिया . तुम्हारी आँखों ने अब कहानियां पीना भी सीख लिया था .

बचपन में एक उड़न खटोले पर मैं और मेरी नानी लेटे लेटे तारों को देखते . नानी पूछती ! इन अनगिनत कहानियों में से कौन सी कहानी सुनोगे . मैं किसी एक तारे की और इशारा करता . नानी शुरू हो जाती.  नानी की कहानियों के पात्र जैसे उसकी खेती थी .  शेर  , शिकारी , गिलहरी, बिल्ली , मोर .... जंगल , खेत खलिहान,पगडण्डी , आले, डिबरी .... नानी पढ़ी लिखी नही थी . शायद इसी लिए उसकी कहानियों में प्रेम और सीख सरीखे  शब्द नहीं होते . उसकी कहानियों का  अंत  " ख़ुशी ख़ुशी रहन " से होता. 
      

     
    

बुधवार, 16 नवंबर 2022

छोड़ना

मैं
तुम्हे
छोड़ना चाहता हूँ
और हर उस बुरी आदत को
जो मुझे तुमसे दूूर करती है

मैं
तुम्हे
प्यार करना चाहता हूँ
और हर उस लम्हे से
जो मुझे प्यार करना सिखाती है .

बुधवार, 3 अगस्त 2022

प्रिय भारत पेट्रोलियम !

 प्रिय भारत पेट्रोलियम , 

 मैं अक्सर तुम्हारी शालीनता की चर्चा अपने कर्मचारियों से किया करता हूं । मैने तुम्हारी शालीनता का बहुत गहनता से अनुभव किया है । तुम्हारा नीला पीला रंग मेरी जुबान से उतरता ही नही । तुम्हारे रंगों से मैने कई बदरंग वस्तुओं , लोगों की सूरत बदलते देखा है । देखो ना ! तुम्हारे पुराने विज्ञापनों में दिखने वाला गधा ज्यादा बोझा उठाने और तेज कदम के बाद भी खुश नज़र आता है । 

मैं बचपन में जब भी अपने गांव आता । तुम्हारी तेल की धार को देखता । तुम्हारी तारीफें मैने उन बुजुर्ग किसानों से सुनी हैं। जो अंत्योदय पर जीवन यापन करते थे । कम पूंजी में जब वो अपने इंजन से ज्यादा माइलेज निकलता देखते थे । तो वो कहते थे । आप का तेल बहुत अच्छा है । कोई बच्चा किसी दूर गांव से आता । साइकिल से 20 लीटर की कैन उतारता । और कहता दद्दा कहते हैं कि वही टंकी से तेल लाओ । 

मैं उस समय उन्हे समझाता था कि। कि ये हमारा तेल नही । भारत पेट्रोलियम का तेल है । हमको जैसा मिलता है । वैसा हम दे देते हैं। अच्छा लगता है । जब कोई अपने जेब खर्च का सही मोल पाता है । तुम्हारे सफेद तेल का लोहा माना जाता है । तुम्हारा तेल जब पंजाबियों के ट्रक में जाता है । तो उनकी रोज़ी का ख्याल बढ़ जाता है । मैने कई पंजाबियों को कहते सुना । तेल तो पड़ेगा तो भारत का । कितना सहज लगता हैं न ! तुम्हारा नाम लेना । भारत ! 

बीच में जब तुम्हारी बोली लगने को आई। तो मुझे कुछ असहज लग रहा था । पता नही चल रहा था । तुम्हारा कौन सा रंग होने वाला है । तुम्हारी शालीनता कहीं प्रतिस्पर्धा में अराजक बाज़ार न हो जाए ।  मैं अक्सर लोगों को जाते हुए लोगों के बारे में कहते सुना है । कि अच्छे लोगों को भगवान जल्दी बुला लेता है । तुम सबसे सुन्दर दिखते थे।  तुम्हारे तेल ने मुनाफे के कीर्तिमान गढ़े थे । सरकार तुम्हारे परफॉर्मेंस को देख कर लट्टू हो गई । कौन न चाहता तुम्हारे तेल पर दौड़ना । लाखों करोड़ों चक्कों की टंकियों में , किसानों के खेत खैलियानों के पानी में , आम आदमी की दैनिक जरूरतों में मैने तुम्हारी मोहब्बत देखी है । 

सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोरोना का हाल तुमसे छिपा नहीं है । दुनिया भर में ऊंच नीच , उथल पुथल । मुझे याद है वो ढलती शाम । एक किसान अपने पत्नी के जेवर लाया था । गिरवी रख कर , कुछ तेल उधार चाहता था । मैं ऊपर छत पर था । छत के ठीक नीचे तुम्हारे नाम का लोगो बना था । उस किसान ने खुली अंजुरी में जेवर उठा के कुछ मांगा था। उसकी मांग पूरी हुई । वो आज भी छलक कर वो दिन याद करता है । 

मैने कई बार सोचा कि तुम्हारी तारीफों को कैद कर लूं । फिर लगा कि तारीफें कैद नही होती । देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है । तुम्हारे तेल से डूबते देश के हवाई जहाज उड़ रहे हैं । तुम्हारी हरित ऊर्जा स्याह दिनों में मन को तसल्ली देती है । तुम्हारे साथ आजादी का महोत्सव मनाना अच्छा लग रहा है । 

तुम्हारा 

जय किसान !

सोमवार, 18 जुलाई 2022

बारिश का शोर !

उन्होंने सफेद कपड़े पहने हुए थे

सर पर सफेद गोल टोपियां
बच्चे भी थे साथ कुछ
रंगीन कपड़ों में
गली कूंचों से निकल
बढ़ रहे थे सब
शहर के एक छोर पर
एक बच्चा सीने से
सोया हुआ था
सफेद चादर में लिपटा
पिछली रात
गलक कर पिछली दीवाल ने
सुलाया था थपकी देकर
बारिश के शोर में
कई आवाज़ें शांत हो गईं।

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...