आज मैंने फिर एक चौकीदार रखा । इससे पहले भी रखा था। पर वो न जाने क्यों चला गया। उसे जाना था , इस लिए वो चला ही गया। उसने ज्यादा दिन काम नहीं किया था। बुज़ुर्ग सा था। कहीं ऊंची जगह से चोरी , कामचोरी के आरोप में भगा दिया गया था। उसके तुरंत बाद वो मेरे पास आया । मैंने उसे रख लिया। किस्सागोई उसपर खूब जचती थी। लंबी चौड़ी हांकना। उसकी सीटी की लम्बी आवाज़ उसकी बीड़ी से बड़ी होती और वह लाठी जमीन पर ऊंची आवाज़ में बजाता ।
अजीब सी कहानी थी उसकी। अधेड़ उम्र से बुढ़ापे के बीच में शादी। और फिर एक बच्चा अपना। दो उसकी पत्नी के पहले से थे। उसकी पत्नी झारखंड के किसी आदिवासी इलाके से थी। कभी किसी जगह शराब के ठेके पर सेल्समैन थी। मैं चौकीदार को मेरे यहां चौकीदारी करने से पहले से जानता था। उसकी बातों में कई बार आया। कई बार लगा कि उससे कह दूं कि जाओ भाई। तुम्हारे हिस्से का संघर्ष झेलना फिलहाल मेरे बस की बात नहीं। नहीं कह पाया कुछ भी उससे। उसकी पत्नी मुझे अक्सर फोन कर के कहती कि उनका ख्याल रखना। उसके बदले में वो मुझे झारखंड की कोई पारंपरिक मिठाई खिलाने की बात कहती। फिर फोन रखते वक़्त कह ही देती। " भाई जी , बच्चे हैं, खाना बनाना पड़ता है और जानवर देखने पड़ते हैं। इसलिए वहां आना संभव नहीं " और ये तो बिल्कुल बेकार आदमी है। बस इसका ख्याल रखना। जितना कमावत है सब बहाए देत है। पर हम से प्यार बहुत करता है। जहां वो पहले काम करता था वहां उसके साथ काम करने वाले कम उम्र के लड़के उसकी पत्नी को फोन कर के परेशान किया करते थे। खैर उसको जाना था । वो चला गया।
वो कुल जमा 7 रातों में 3 ही दिन जाग पाया। बाकी 3 दिन सोया । एक छुट्टी भी । उसके बावजूद 500 रुपए मांगने की हिम्मत उसने की । उसने बताया कि उसकी पत्नी की तबियत खराब है। जब वो छुट्टी से लौट कर आया। उसने बताया कि जन्माष्टमी में उसने झांकी सजाई थी। रात भर जागरण हुआ। पूरे गांव को प्रसाद बटा। उसने वो सारे पैसे उसमें खर्च हो गए। वो उसका आखरी दिन था ।
साल पहले जब मैं यहां आया था। मुझे बताया जाता कि यहां बहुत चोरियां होती है। चोरियां का कारण जानने में किसी को दिलचस्पी नहीं रहती। पर मुझे थी . क्यों कि चोरियां वहां होती हैं जहाँ कोई रहता नहीं है या रहते हुए भी लोग निष्क्रिय रहते हैं .
मैं आश्चर्य से सोचता। "कस्बे के मुहाने पर एक ऐसी जगह जहां दस बीस घर फौजियों के। क्षेत्रीय विधायक के कार्यालय की गश्त सुना है बड़ी तगड़ी होती है। फिर भी इतनी शातिर चोरियां। कभी कभी दबंगई के साथ चोरियां। "
मेरे घरवाले मुझसे पूछते हैं कि मैं जागता क्यूं हूं। जागे न तो चोरी हो जाएगी । मुझे आज तक कोई आदमी चोरी होते नहीं दिखा। और न ही आस पास के लोग उठते दिखे .
ये नया चौकीदार , चौकीदार नहीं लगता है .
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