लिखना जरुरी है . क्यों की लिखे को मिटाया जा सकता है . लिखने के पहले , लिखने वाली बात पर सतर्कता से ध्यान लगाया जाता है . ध्यान लगाने से भीतर की दुनिया की सैर की जा सकती है . सैर से न दर्ज हुयी कहानियां हलचल पैदा करती है . निकलने को बाहर आतुर होती हैं . न जाने उन कहानियों से किनका भला होगा ? फिर भी लिखना जरुरी है क्यों की लिखने से मन शांत होता है .
मैं जब लिखने को पहचानने की कोशिश करता हूँ . तो मुझे अधिकतर लोग लिखते हुए दिखाई देते हैं . थाने का मुंशी तहरीर लिख रहा होता है . डॉक्टर पर्चे लिख रहा होता है . मां हिसाब लिख रही होती है . साहित्य लिखने वाले कवितायेँ लिख रहे हैं , कहानियां लिख रहे होते हैं . पन्ने दर पन्ने लिखा जा रहा है . पन्नों की चिंता किसे है ! पन्ना ख़त्म होते ही दूसरा पन्ना इस्तेमाल आता है . उसके ठीक पहले का पन्ना उम्र काट रहा होता है . फिर भी लिखना जरुरी है . क्यों की लिखने से मन के पन्ने खाली होते हैं . खाली मन पर कोई सुखद याद लिखी जा सकती है .
मैं अपने आस पास हर शख्स से लिखने की आदत में विस्तार की सलाह देता हूँ .
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