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गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

कलम चोर !

एक बड़ी संस्था के 

ऑफिस टेबल के नीचे

ठीक बीचों बीच 

एक पेन तीन दिन पड़ा रहा 

ऑफिस में आने वाले

अधिकारी , कर्मचारियों

की रीढ़ की हड्डी की लोच 

खत्म हो गई होगी शायद

चौथे दिन सफाई वाली

आंटी भी पेन वाले 

हिस्से को छोड़ 

पूरे ऑफिस में 

झाड़ू पोछा कर देती 

ऑफिस में चाय वाले

छोटू की नज़र 

रोज़ उस पेन पर पड़ती

एक दिन छोटू ने 

मौका देख पेन जेब 

में रखा और चला गया 

दूसरे दिन 

पेन के गायब होने की

शिकायत एक दूसरे से 

करते नज़र आए कर्मचारी , अधिकारी

सी सी टी वी में

पेन को उठाते हुए 

छोटू को देख 

सब भड़के 

छोटू को धमकी 

हिदायतों के साथ 

उसकी चाय पर 

प्रतिबंध लगाया गया 

और उससे वो पेन

वापस टेबल के ऊपर

रखवा लिया गया ।

बुधवार, 13 नवंबर 2024

बड़ी अम्मा !

हर सांझ छुट्टी की 

गलियारे में कहीं 

भूसौरी के पास 

दूध दूहती अम्मा 

कहती "ला उरे 

ग्लास लइया अपनी 


ग्लास में झाग वाला दूध

दूध वाली मूंछें लिए

पूरे आंगन में नाचता 

अम्मा से शाम की 

कच्चोंनिया का भी

वादा कर लेता


अम्मा दूध घी 

को पहचानती

और 10 बच्चों में 

मुझे सबसे ज्यादा


आज अम्मा कई दिनों से

वेंटीलेटर पर है 

बेसुध , हांथ से अनजाने

निकालती अनगिनत नलियां 

अपने शरीर से 

मैं घर पर अम्मा के लिए

कई दिनों से दूध से 

दही , दही से मठ्ठा 

और मट्ठे से नयनू 

निकालने की कोशिश में 

परेशान हूं 


अम्मा को अपने हांथ का

बिलोने वाला घी

चखाना चाहता हूं

थक कर चूर बैठता हूं

घर में , अम्मा के कमरे में


हिम्मत से खाली

मैं कुछ नहीं कर सकता

आई सी यू में डॉक्टर

के अलावा कोई कुछ 

नहीं कर सकता 


खबर आती है 

अम्मा ने कई दिनों से 

आंख नहीं खोली है 

मुंह से बोल नहीं फूटते

अम्मा के दस बच्चों में

से 9 हैं उसके आस पास 

मैं दूर अम्मा की नकल करता 

प्रार्थना करता 

अम्मा के लौट आने का 

ग्लास हांथ में लिए

खाली ! 


रविवार, 20 अक्टूबर 2024

AI

 

इन दिनों भागता फिरता हूं

खुद से , मोबाइल से 

और अपनों से 

सब काटने दौड़ते हैं 


दौड़ता हूं मैं भी 

एकांत ढूंढने 

काट खाता हूं 

जो भी ऊंची आवाज में 

कहता है कोई काम 

और भूलता है बदले में

चुप देना 


समझ लिया जाना चाहिए 

खुद ब खुद 

भाव भंगिमाओं से और 

चाल चलन से मेरे


क्या हम भूल गए हैं 

इंसानी नब्ज़ को 

रात की थाली में 

परोसे हुए तारे 

पोखर का किनारा 

हरा भरा उपवन , मन 


और बैठ के साथ 

कुछ वार्तालाप, आदान प्रदान 

विचारों का भी 


भागते भागते लिखने का प्रयास

भी होता है टूटने के बाद 

कुछ दर्ज कर लेना 

जैसे इतिहास लिखा जा रहा हो 

नीरव अनुभवों का 

हार को जीत में दर्ज कर लेना

विजय नहीं है 


नया शगल आया है 

जीवन में AI  का 

घने लदे बादलों में के बीच से 

एक बूंद गिरती है 

दृष्टि भर ऊसर में 

उग आती है गेहूं की एक बाली 

और भी सारा कुछ एकांत 

में लिपटा मिल जाता है 


नहीं ढूंढ पा रहा हूं खुद को 

भागते भागते सड़कों , गांवों 

शहरों के मध्य 


मन के गहरे तलहटी में 

दुनिया के दूसरे हिस्सों में 

चल रहे युद्ध की चीत्कार

और युद्ध की विवशता पर 

खीझ काई सी लगती है 



शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

प्रियो की पीर !

 क्या ऐसा कोई हो

टोका गया न हो 

भीतर की गगरी छलके

अंदर का जवार न हो 


कोई ऐसा क्यों नहीं 

दुखता , व्यतीत होता 

समय के हाल पर 

अपनों के सवाल पर 

दिखते उड़ते कीट पतंगे


मां कहने को मजबूर

निकल जाओ फरक नही 

पिता फूटी आंख न सोहता 

पत्नी बच्चे फूंस पर गांठते


रेंगते कनखजूरे स्वस्थ होते

जंगलों में लताओं में 

भेड़िए निकल आए जंगलों से 

जल भराव भूचाल आंखों में

तरसते अपने प्रिय के बोल 


सृजन से संभव है प्रिय जन

घोंसले में पड़कुली 

सेती

प्रियों की पीर !


गुरुवार, 19 सितंबर 2024

निकला हूं मैं दिन खर्चने

 

निकला हूं मैं दिन खर्चने

थोड़ा नमक थोड़ा सुकून 

थोड़ी सी ले परेशानियां 


निकला हूं मैं दिन खर्चने

निकला हूं मैं दिन खर्चने 


बहती यहां नदियां नहीं 

कोयले भी अब जलते नही

खलती है मुझको उधारियां 


निकला हूं मैं दिन खर्चने 

निकला हूं मैं दिन खर्चने 


ये देखा वो देखा 

उसका ठेका इसका ठेका 

पेलम पेल चले है रेल

आगे निकले जाए तेल

धोखा है सब धोखा 

गली ने सबको रोका है 

फिर काहे का छौंका है 


मैने छोड़ी जिम्मेदारियां ....


निकला

 हूं मैं दिन खर्चने ...


बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...