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गुरुवार, 1 अगस्त 2019

दूरी !

हम मिलते हैं रोज़
सैकड़ों किलोमीटर की थकान
मनों भार लेकर
भिड़ जाते हैं आमने सामने

भिड़ने के बाद
दो दूनी चार
बटे, हँसिल दुनिया
बच जाती है
रोज़
सुबह दोपहर शाम
दूरी कोई दूरी होती है भला !

बुधवार, 31 जुलाई 2019


बीज !

रक्त के बीज गिरे जहाँ
फूल पल्लवित हुए वहाँ
भोग कर रक्त को रक्त में
पानी पानी डूबे आदमी ने
न जाने कहाँ जगह ली !

समय की तेज धारा ने
रक्त को मैला किया
धवल करती रहीं
रक्त की पैदाईशें ।

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ये कहने वाले
सब हमारे घराने के हैं
देखिए न ! रात टूटी हुई है

और तारे ऐंठ के कहते हैं
जरा मद्धम !
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सोमवार, 20 मई 2019



फूल बाज़ार !

फूल बाज़ार के धन्नी सुबह 3 बजे चल देते हैं अपने घर से। हेलमेट पहने धन्नी, लुंगी में फूलों का गट्ठर बांधे 30 किलोमीटर की दूरी से आते हैं। धन्नी जैसे तमाम और धन्नी।  "गेंदा" वाले होते हैं। गुलाब वाले रसिकलाल सुबह 6 बजे आते हैं। छोटी छोटी पोटली बांधे, साइकिल पर शहर के आस पास से आते हैं। 6 बजे के बाद कमल का फूल, लिली, बेलपत्री, नारगुज़रिया बाकी के सब आते रहते हैं झोलों में।
  अपनी जड़ों से उखड़े हुए फूल महक देते हैं। छिटके जमीन पर गिरे फूल, सूख के गुलगुले गद्दे हो जाते हैं। सबसे मज़ेदार बात यह है। चिड़ियाँ न जाने क्या फूलों में चुनने आती हैं। गैरिया भी । भवरें, मधुमक्खियां, ततैया को शायद टूटे हुए फूल पसंद नही हों। चिड़ियाँ डरती तक नहीं उनसे जिन्होंने फूल तोड़े हैं। धन्नी और रसिकलाल जैसे लोगों के पैरों के बीच फुदकती हैं। उनके सामने उनकी डलिया के फूलों में चोंच मार कर कुछ बीन ले जाती हैं। वो बीना हुआ दिखाई नही देता।
   फूलबाज़ार के रंग, महक और रस एक बड़े से नाले के पास रखे जाते हैं बिक्री के लिए। फूलबाज़ार के फूल भगवान से शैतान तक चढ़ने के लिए तैयार रहते हैं।

बुधवार, 13 मार्च 2019

बदलावों के नियम नही होते

आड़ी तिरछी रेखाएं
भागती हैं हथेलियों से
भीतर बाहर ।
धौकनी की तेज लपट में
बदलूँ की न बदलूँ
कई बार स्वाहा होता है ।
नफ़ा नुकसान की बहियाँ
रख देनी होती हैं
ठंढे बस्ते में
कभी लोमड़ी, कभी गिलहरी
तो कभी पीपल के पेड़ की
कोयल हो जाना होता है।

गुरुवार, 7 मार्च 2019

ख़त्म न हों कहानियाँ !

कहानियाँ खत्म न हों
किरदार खत्म कर दो

ये सीख नही
कोई अनुभव भी नही
बीच का
कोई करार होगा शायद

भूल गलतियों के
न जाने कितने टेक चलते रहे
कहानी किरदार
आमने सामने
गुथते रहते

भीड़ के सामने दोनों
ऐसे खत्म होना चाहते हैं
याद किए जाएं वो
एक कहानी एक किरदार की तरह
अपनी आस पास की
कहानियों में !

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...