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सोमवार, 13 जनवरी 2014

लकीर सीधी अच्छी नहीं होती !

बिना मुड़ी तुड़ी सीधी सादी 
लकीर, किस काम की ?
न चाहत कि आकृति बनाने कि गुंजाईश
न अपेक्षाओं का अंत। 
बड़े जतन से नन्हे हांथो से 
सीखा था 
सीधी लकीर बनाना 
विशवास और अपनेपन 
कि स्याही से
और गाढ़ा करता रहता हूँ इनको
हर कोशिश करता हूँ उन्हें
मजबूत बनाने कि।
हर बार चौड़ी होती लकीरों को
कोई बड़ी लकीर कर देती है
छोटा
उसके बढ़ने से मैं और छोटा होता जाता हूँ।
फिर पीटता रह जाता हूँ दूर से
खुद से ही बनायीं हुयी लकीर को
बढ़ती लकीरों को देखता रहता है
ये लकीर का फ़कीर
लकीर से एक बिंदु होने तक
सच ही तो है
लकीर सीधी अच्छी नहीं होती .....प्रभात

गुरुवार, 2 जनवरी 2014

बंदिश न लगा तू गर्दिश में गर्दिश भी तो है बंदिश में कुछ जोर लगा मन मोड़ जरा कुछ देर सही फूटपाथ सही मनमार सही वनवास सही बंदिश न लगा तू गर्दिश में गर्दिश भी तो है बंदिश में

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013




बिहार में विहार
खाने का असली मजा लेना हो तो गाँव कि ऒर बढ़ो,बिहार के एक छोटे से गाँव के ईंट भट्टे में काम करने वाले मजदूरों कि लिसी पुती रसोईं में जब सील बट्टे पर पिस्ते एक दर्जन से ज्यादा  खड़ा मसाले कि महक जब नाक के रास्ते दिल में गयी तो सहसा खुद चिकेन बनाने का रिस्क लेने का हौसला न जाने कहा से आगया। हलकी गुलाबी ठण्ड, झोपड़ी कि दराज़ों से  रिसती शीत लहर,मिटटी पर  पड़ी ओस कि बूंदों से नम मिटटी कि सोंधी खुशबू के बीच देशी मुर्गा,,,कढ़ाई में,,,,,,कढ़ाई में पाक रहे मुर्ग के टेक्सचर को देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं ,,,,,,,,,,,,

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2013

चुप रहो,चुप रहने में ही समझदारी है,
न जाने कौन सी बात बतंगड़ बन जाए।
बेवजह बात होती है पत्थर कि तरह,
कही पत्थर से समुन्दर सुनामी न बन जाए।।
.........................................प्रभात सिंह 

रविवार, 20 अक्टूबर 2013

मुंडन बालों का होता है , नर्म मुलायम खाल का नहीं

हो गया मुंडन
नन्ही सी जान के कोमल से सर पर उस्तरा चल ही गया
पेट के बाल अब नहीं रहे
पिता अपने गोद में घुटते हुए सर को लिए "आहिस्ता आहिस्ता "कहता रहा
नन्ही चीत्कार को अपने अन्दर जज्ब करता रहा
कोमल त्वचा पर उस्तरे की धार, वार पर वार करती रही
सुर्ख लाल खून से शर्ट की बाजू लाल हो चली
नन्ही कली की बुआ ने अपने  बहते आंसुओं के साथ
आंटे की लोई में मुलायम बाल बंद कर लिए
हो गया मुंडन ,बधाई गीत गाओ
हो गया मुंडन
माँ कहती है की मुंडन साल भीतर ही शुभ और अच्छे होते हैं
दिल कहता है की कम से कम पांच साल में हो
क्यूँकि मुंडन बालों का होता है नर्म मुलायम खाल का नहीं।।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, प्रभात सिंह 

बैटरियां !

  ये बैटरियों  ने आज कल नाक में दम कर के रखा हुआ है . पिछले कुछ सालों से ऐसा लगता है जैसे बतेरियाँ ही बदलवा रहा हूँ .  कभी धंधे की , कभी घर ...