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गुरुवार, 1 अगस्त 2024

सुनो !


पूछते क्यों नही 

आकाश का पानी

कहाँ गया सारा


धरा की प्यास

बुझी नही 

क्यों अब तक ?


कब तलक

झुकी घटाएं 

नाट्य रूपांतरण

करती रहेंगी 


मेरी प्यास पर 

रोना आता है मुझे

मुझे मेरी तरह 

निबाह लो !


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