पूछते क्यों नही
आकाश का पानी
कहाँ गया सारा
धरा की प्यास
बुझी नही
क्यों अब तक ?
कब तलक
झुकी घटाएं
नाट्य रूपांतरण
करती रहेंगी
मेरी प्यास पर
रोना आता है मुझे
मुझे मेरी तरह
निबाह लो !
उड़ने दो , उड़ने दो बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए तो भी तो उड़ने दो .. जिस ऊर्जा का संचार प्रवाह हो उद्दंड उसको भी उड़ने दो कह...
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