प्रेम कहना
और उड़ लेना
ततैये के पंख पर
हो लेना
हवा के साथ
समय से दूर
उस व्यक्ति से भी
जिससे आप प्रेम करते हैं।
बचा के रखना होता है
प्रेम को
उन पलों के लिए
जिनकी साख पर
क्रूर हांथों वाली
जानलेवा महामारी
तांडव करती है ।
मैं गया था और लौट आया सकुशल बगैर किसी शारीरिक क्षति और धार्मिक ठेस के घनी बस्ती की संकरी गलियों की नालियों में कहीं खून का एक कतरा न दिखा ...
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