कब तक अतीत से भागे मन
मन भीतर करता क्रंदन
सांझ कंटीली, प्रीत चुटीली
रिसता आंगन, नीर , गगन
धैर्य बुलावे पास ना जावै
उग्र बुढापा चिर यौवन
मरता करता क्या ना करता
देख डरें जो चोर नयन !
गुड की ढेली , नीम हथेली
इक खाट बिछे सब जन धन ।
उड़ने दो , उड़ने दो बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए तो भी तो उड़ने दो .. जिस ऊर्जा का संचार प्रवाह हो उद्दंड उसको भी उड़ने दो कह...
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