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रविवार, 15 अक्टूबर 2017


वो शहर
काट आया हज़ारों साल
किस्सों के बियांबां में
अब वो है, और उसकी तन्हाई

चाँद आता है ज़मीन पर
दो शक्ल लेकर
सुलग कर रात भर
राख होता है

मरने के मुक़द्दमें
ठहरे हुए हैं
ज़िन्दगी की दहलीज पर
ख़्वाब, कुछ और
मुल्तवी हुए हैं।

#राम_जू_की_अजोध्या

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