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गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

मैं आ रहा हूं ... #imamdasta

 


जो सिनेमा हमारे नज़दीक के थिएटर या ओ टी टी प्लेटफार्म पर पहुंचता है । वह हम दर्शकों को तश्तरी में परसा हुआ मिलता है । 150 से लेकर 600 रुपए के टिकट के साथ एक फिल्म हमारे सामने बड़े - छोटे परदे पर सजी होती है । पॉपकॉर्न के साथ फिल्म हमारे मानस पटल पर कुछ देर रहती है । और फिल्म के उतरते ही खत्म ! 

फिल्म कैसे लिखी गई , कैसे शूट हुई , कैसे पोस्ट प्रोडक्शन हुआ , कैसे डिस्ट्रीब्यूट हुई । इन सब का ब्योरा चल चित्र पर दे पाना संभव नहीं होता । फिल्म के शुरुआत और आखीर में जो नाम स्क्रीन के ऊपर की ओर स्क्रॉल होते नज़र आते हैं । वो आधे भर होते हैं । 

पूरी फिल्म को मूर्त रूप देने में कई गुमनाम लोग भी होते हैं । उनमें से आधे से ज्यादा लोग शायद फिल्म को देख भी न पाते हों । 

तश्तरी का पहला निवाला ऐसे लोगों के लिए होना चाहिए । पर अर्थ तंत्र पर घूमता सिनेमा स्याह सुफैद परदे पर ही दिखाता है । परदा जो टिकट से खुलता है । 

एक फीचर फिल्म आने को है । नाम है #imamdasta । 2 घण्टे 20 मिनट की फिल्म लखनऊ और देश के कई सिनेमा घरों  में गरज के साथ छींटे की तरह आने को तैयार है । 

फिल्म के राइटर ,  डायरेक्टर , प्रोड्यूसर  Rizwan Siddiqui कई रातों से सोए नही है । उनकी पहली डेब्यू फिल्म जो ठहरी । 

 फिल्म के कास्ट Saharsh Kumar Shukla Jay Amice Raju Pandey Rakesh Sharma Lal Mani  Ambrish Bobby आदि इत्यादि टकटकी लगाए फिल्म के आने की खुनकी महसूस कर रहे होंगे । 

बहुत सारे नाम हैं जो ऐसे समय पर याद नहीं आते । वो कहीं न कहीं कोई न कोई फिल्म बुन रहे होंगे ।

 मैं एक फिल्म देखना चाहता था करीब से । मैं शूटिंग के शुरू होने के पहले दिन से ही इस फिल्म के साथ जुड़ा हूं ।

 मैं मुंबई से उस लखनऊ में आया हूं । जो मुंबई हो जाना  चाहता है । मैं उत्तराखंड से मुंबई होते हुए लखनऊ आया हूं । मैं बिहार से मुंबई होते हुए लखनऊ आया हूं ।

 मेरा नाम पिंटू हो सकता है । मेरा नाम रज्जन हो सकता है ।

 मैंने देखा है इस फिल्म को बनते हुए । मैने सही है । लखनऊ के बीहड़ में 47 डिग्री तपिश । और झड़ी लगी बरसात से सुबकती पुरानी हवेली की चिपचिपाहट को मैने महसूस किया है । मैने देखा है तंगहाली में बिरयानी से कद्दू पूड़ी का सफर । मैने जिया है एक सख्त दौर चन्द दिनों में । जो कहीं नहीं दिखेगा सुनहरे परदे पर । 

मेरे लिए सिनेमा एक काम है । जरिया है रोजी रोटी का । दिन और रात , गोरी मेम , माचो सर का तिलिस्म पहले पहल सुनहला लगा था । स्त्री पुरुष की नजदीकियां मुझे अब हैरान नही करती । 

पर मैं देखना चाहता हूं । बगैर स्क्रिप्ट पढ़े , मैं महसूस करना चाहता हूं अपनी मेहनत को । महसूस करना चाहता हूं । जब सीन बन रहे थे । तो पीछे खड़ा था कुछ न कुछ काम कर रहा था । पानी ला रहा था । खाना दे रहा था । कुछ न कुछ सिल रहा था ।  बड़े बड़े भारी उपकरणों को दिन में कई बार इधर से उधर रख रहा था ।   प्रोड्यूसर , डायरेक्टर , डिस्ट्रीब्यूटर , प्रोडक्शन , सिनेमा हॉल के पहली तीन पंक्ति को छोड़ सारी पंक्तियों में में हूं । मुझे मालूम है ये फिल्मी दुनिया की हर चीज़ बहुत कीमती होती है । 

मैं आ रहा हूं । अपनी फिल्म देखने । जिसमें मेरा नाम नही होगा । नाम नही होने से एक दर्शक का दर्जा पाक साफ रहता है  । एक दिन की दिहाड़ी का हरजा मुझे अखर नही रहा है । मैं सिनेमा घर की सबसे आगे या सबसे पीछे वाली पंक्ति पर बैठा मिलूंगा । आप आ रहे हैं न ? मुझसे मिलने ?

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

WOK !

 


हाय ! 

हेल्लो ! ( लड़के ने अभीवादन स्वीकारते हुए एक मुस्कान से बात खत्म करने की कोशिश की  ) 


लड़की ने सर झुका सिगरेट को कस के उंगलियों के बीच में दबाया। और कान में लगे इयर फोन्स को सुनने लगी । 

सामने के सोफे पर लड़का भी न जाने किस धुन पर पैर हिलाता रहा । 


धीरे धीरे शेयर इन कैफे में लड़कों की आमद बढ़ती रही । 

लड़की बिंदास कश पर कश लगाए उन नयन बंकुड़ो को इग्नोर करती रही । 

शेयर इन कैफे का नाम तो शेयर से ही पड़ा हो शायद । पर छोटे शहर के कैफे की क्षमता किसी लड़की को सोफे पर लड़कों की तरह सुट्टा मारते देखने की अभी नई पनपी थी । 

व्हेयर आर यू फ्रॉम ? लड़की ने सामने बैठे लड़के से पूछा । 

लड़के ने जवाब दिया । हेयर ओनली । 

दोनों एक दूसरे के सामने बैठे मूक अपने अपने आखरी कश तक चुप बैठे रहे । सिगरेट के खत्म होने के कुछ और सेकंड के बाद लड़का उठता है । और लड़की की उठती नजरों से तालमेल बिठा कर । इशारों में पूछता है !

लड़की एक उंगली उठा कर इशारा करके वन मोर की लिप्स रीडिंग करती है । 

लड़का बिना पूछे । अपने ब्रांड की सिगरेट ला कर लड़की की ओर बढ़ा देता है । और लाइटर से उसके होंठ में दब चुकी सिगरेट को जलाने झुक जाता है । उसकी जला कर । अपने सोफे में बैठ जाता है । 

कुछ एक कश के बाद दोनों के बीच बिना किसी आधार के संवाद शुरू हो जाता है।  

उस शाम की आखरी सिगरेट को खत्म होते होते । दोनों एक दूसरे का नाम , काम और कॉन्टैक्ट नंबर शेयर कर चुके थे । उन्हें याद रहा किस तरह कुछ लड़के कैसे घेर के तेज तेज बातें करने लगे थे । 


दोनों अपने अपने रास्ते घर को चल दिए थे । दूसरे दिन शाम को लगभग उतने ही समय दोनों फिर शेयर इन में होते हैं । दोनों की सिगरेटों के साथ लड़की कुछ कुछ गाली के साथ खुलती है । जैसे उसके भीतर से किसी ने तेज़ाब उड़ेल दिया हो । वो खुल के रोती रही उन दो सिगरेट के बीच । 

छोटे शहर के संस्कार उसे जीने नही दे रहे थे । और बड़े शहरों का ताप उसे बर्दास्त नही हो रहा था । 

उसे वाकई शेयर इन के लम्हे भावुक कर रहे थे । जैसे उस शहर में उसे कोई सुनने वाला ही न बचा हो पीछे। 

लड़का सतर्क रहता । वो पहले भी ऐसी कई जिंदगियों में प्रवेश कर चुका था । जहां से निकलने का रास्ता सिर्फ किसी एक के लिए होता है । दूसरा डूब ही जाता है । 

  दोनों के बीच संदेशों का आदान प्रदान चलता रहता है । लड़की मास कॉम की छात्रा है । और शहर की ऊट पतंग जिंदगी से आज़ीज़ आ कर इस तरफ रुख की थी ।और लड़का अधेड़ उम्र का शादी शुदा बच्चे वाला । इन तथ्यों को उजागर होने की गुंजाइश दोनों ने नही छोड़ी थी । दोनों के व्यक्तिगत जीवन में क्या चल रहा है । इन बातों से इतर लिखने लिखाने की बातें होती रही । 

    लड़की को लिखने की जरूरत लड़के को जरूर महसूस होती । वो बार बार लड़की से जीवन की पहेलियों को लिखने के लिए बोलता । एक दिन लड़की ने कुछ अंग्रेजी में लिख कर भेजा था । " वोक " । इस शब्द के अर्थ और उसके नीचे लिखी पंक्तियां लड़के के समझ से बाहर थी । लड़के को अंग्रेजी बहुत कम आती थी । पढ़ने की कई बार कोशिश की । पर उस लिखे का अर्क समझ आ गया था उसको । उसने कुछ आखरी पंक्तियों पर टिप्पणी कर जता दिया कि उसने पढ़ा है । 

लड़के को पढ़ना एक दम पसंद नही था । पढ़ने से चीजें गहरे उतरती हैं । और चोट करती हैं । पर लिखने से ? 


इस पढ़ने लिखने के चक्कर में दोनों बात करने के मौके तलाशते । कभी कभी सिगरेट या लड़की को भाषा में ड्रैग पर भी चर्चा होती । दोनों ने शेयर इन कैफे जाना छोड़ दिया था । 

लड़की की गाली से भरी बातें , सिगरेट का हक से सिगरेट पीना और दुनियादारी की परवाह न करना । लड़के को भाता था । लड़की को उसको उकसाने वाला चाहिए था । जो उसको उस ज़िंदगी से बाहर निकालने के लिए झकझोर दे।  


वो बताती थी । उसके घर वालों ने उसका निकलना बंद कर दिया है । और तमाम सारी बंदिशें थोप दी गई उसके ऊपर । लड़की के इर्द गिर्द पुरुषों का समाज ऐसे ही दिखता था । लड़कों के व्यवहार में लड़कियां अच्छी नहीं लगती । फिर भी वह बाहर निकलती है । जिमजाती है । और दिन प्रतिदिन प्रतिरोध जताती । 


क्रमशः ....

गुरुवार, 9 नवंबर 2023

प्रिय तुम !



जब तुमने जन्म लिया था । तो तुमको बहुत देर छूने से गुरेज़ करता रहा । बहन ने रख दिया था । तुम्हे मेरे हाथों में । अपनी पतले हाथों की हड्डियों पर मैं तुम्हे महसूस कर रहा था । मुझे डर लग रहा था । मेरे हड्डियों वाले हाथ तुम्हे कहीं तकलीफ न दे।  मैं तुम्हे टेलीफोन की उन तरंगों से बचा लेना चाहता था । जो लगातार मेरे मोबाइल में बज रहा था । मुझे याद है । तुम्हे मैने कई घंटों बाद छुआ था । 

तुम्हारी तस्वीर कहीं होगी । पर मेरे दिमाग में उस चित्र की कोमलता महसूस होती है हमेशा । 

इन दिनों तुम कई मोर्चों से लड़ रहे हो । क्रिकेट वाला मोर्चा सबसे कमज़ोर पड़ जाता है । पढ़ाई में तुम्हारा मन नहीं लगता । ये बात कुछ तकनीकी पचड़े में पड़ के नेपथ्य में जाती रही है।  

मुझे अफसोस है । कि मैं तुम्हारी डायरियां चुपके से पढ़ लेता था । फिर भी मैं तुम से सामंजस्य नहीं बैठाल पा रहा हूं। शायद यही कारण हो । तुम्हे तुम्हारी मन की बात जान कर उस पर तीखी प्रतिक्रियाएं तो दी हैं । बगैर तुम्हे जताए कि मैं तुम्हारी डायरी पढ़ता हूं ।

तुम्हारी हर झूठ के पीछे मै अपने भीतर टटोलने लगता हूं।  अपने आस पास के वातावरण को देखने लगता हूं।  तुम बहुत तेज़ी से बड़े हो रहे हो । तुम बड़े हो रहे हो । इस बात का एहसास हम हमेशा तुम्हे कराते रहते हैं।  पुरुष होने के नाते मैं तुम्हारे शरीर में हो रहे बदलावों को महसूस करता हूं।  तुम्हारी मनः स्थिति कुछ कुछ समझ आती है । समय का बीतता हर लम्हा तुम अपनी मुठ्ठी में गेंद बना कर खेलना चाहते हो । मुझे तुम खेलते हुए बहुत सुंदर लगते हो।  मेहनत करते हुए । अपने हम उम्र के साथ दौड़ते भागते हुए । कुछ बंदिशों को तो शाम का एक घंटा भी बहुत हल्का लगता है । 

तुम्हारी ट्रेन की दिवानगी देखी है मैने । महसूस की है बहुत । तभी मैं पिछले कुछ सालों से स्टेशन , ट्रेन , आती जाती आवाज़ें , रेल का एक लंबा सफर मिस करता हूं । तुमने तो बहुत किया होगा । तुम्हारे जन्म का समय हमारे सबसे खराब दिनों में पूरे परिवार को बांधे रखा है । एक बड़े से परिवार का टूटना जड़ों को हिला देता है ।  उस हिलते , डुलते हिंडोले में कोरोना । तुम बढ़ते हुए रोज कई कहानियों से गुजर रहे होते हो।  मम्मा की , पापा की , दादा दादी की । और चाचा ताऊ अंतहीन रिश्तों की कहानियां तुम्हे सुनाई देती होंगी । उन कहानियों में तुम्हारे कानों ने क्या सुना होगा । वो केवल तुम ही जानते पहचानते होगे।  

हमारे समाज में पिता के सामने बोलना , मां के सामने बोलना और बड़ों से बात करना बहुत सिखाया जाता है । चौबीस घंटे में हर बड़ा कुछ न कुछ नसीहते दे रहा होता है । डांट से , मार से , भय से बाहुबल से तुम्हे दबाने की कोशिश कर रहे होते हैं हम । प्यार की आड़ में । तुम्हारे ख्याल के सार्टिफकेट तुम्हे दिखाते । 

मैने भी कई बार आपा खोया है । तुम्हारे शरीर पर मेरे बल के निशान बहुत समय तक मेरी देह को महसूस होते हैं ।हम सब अपने अपने हारने की खीझ को कहीं न कहीं जाया कर रहे हैं । तुम्हारी ऊर्जा का जवाब हमारे किसी के पास नही है । 

तुम्हारे किशोरावस्था में प्रवेश का दिन तारीख तो नही निश्चित है । पर कहीं से तो तय करना पड़ेगा । तुम्हारे जन्मदिन के तोहफे के रूप में तुम्हे कुछ ऐसा दे पाऊं । जो मेरे तुम्हारे बीच के वात को भर पाए । 

मैं हमेशा सोच में रहता हूं । कि तुम से अपने दिल की बातें साझा करूं । पर नही हो पाता । शायद तुम भी कहीं न कहीं अपने पापा को मिस करते होगे।  मैं तुम्हारा बचपना बहुत मिस करता हूं । तुम मुझसे बच्चे बन के कई सारी बातें मनवा लेते हो । पर मैं तुम्हारा बड़ा होना महसूस कर पा रहा हूं। 

तुम्हारे बड़े होते कदमों में कदम ताल कर के हम कोशिश करें अपने स्थापित मापदंडों को पर रख कर । मुझे मालूम है अच्छे जीवन के लिए प्रेम होना जरूरी है । प्रेम से स्फुटित तमाम धाराएं संयोजित होती हैं । मैं भी अभी तुम्हे अपना दोस्त तक न बना पाया । दोस्ती हो तो प्यार हो । 

मैं खुद को अभी इतना बड़ा नही मानता । कि तुम्हे कहूं कि तुम ये बनो , वो बनो । तुम्हारी रुचियों को मैं सुनने की कोशिश करता हूं । उन्हें पुष्पित पल्लवित करने की सोचता हूं । 

बच्चे जो बड़े होने की दहलीज़ को छू रहे हों । उन्हें कंधों की जरूरत होती है।  कंधों की जगह क्रोध से भरी आंखें मिले तो वो क्यों कर महसूस करें ।

मैं तुम्हारे 12 वें जन्मदिन पर हर बार की तरह कुछ नही दे पा रहा हूं । मैं कोशिश करूंगा तुम्हे एक डायरी भेंट करूं ।  कुछ किताबें और लाकर दूं । एक ट्रिप कहीं लंबी ट्रेन वाली उड़ चलें हम साथ । जीवन के मोती चुनने । एक क्रिकेट किट तुम्हे उपहार दे सकूं । 

और सच पूछो । जो किताबें तुम्हारे पास हैं । उन्हें गुरु बनाने के मौके मत छोड़ना । 

तुम्हारे लिए खत लिखना मुझे अच्छा लग रहा है । मैं इस बहाने खुद को टटोल लेता हूं । 


रविवार, 22 अक्टूबर 2023

युद्ध के बाद बुद्ध बन आना !



एक सुबह आंख खुली तो बिग ब्रेकिंग ने दिमाग हिला दिया । फिलिस्तीन के हमास ने इजरायली महोत्सव को मातम में बदल दिया । हर जगह खबरें बिल में से निकल आईं । उस भयंकर हमले ने इजरायल को हिला के रख दिया । इजरायल ने उसी वक्त कहा । कि हम जंग में हैं । 

उस हमले का प्रहार नृशंस था । उसके जवाब में इजरायल का जवाब अंतिम और निर्णायक रहने की आशंका है । युद्ध बीच में छूट जाए । तो घाव ज्यादा तकलीफदेह होते हैं । 

इन दिनों दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में डर , दहशत और लाशों के ढेर पर अस्त व्यस्त जिंदगी सड़कों पर है । 

बच्चे , महिलाएं और बुज़ुर्ग असहाय महसूस करते होंगे । कब कहां से मौत का फरमान आ जाए । खाने पीने के लाले । हर जगह कोहराम मचा है । 

पिछले साल एक युद्ध शुरू हुआ, अभी खत्म तक नहीं हुआ । और अब दूसरा । हजारों लोगों की जानें गईं । उन जानों के पीछे रह गए क्षत विक्षत देह शरण के लिए भटक रहे हैं । 

न जाने कितने इजरायलियों को घर द्वार खाली करने पड़ रहे हैं । जितने रॉकेट उतने सायरन । जितने सायरन उतने धमाके । कहीं जमीन पर तो कहीं आसमान में । 

दोनों देशों की तरफ से वार टैक्टिक्स इस्तेमाल की जा रही हैं । एक अत्याधुनिक और एक गुरिल्ला । युद्ध से हम सब बचते हैं । पर दोनों ओर से हथियार उठाने वालों को दिल से सोचने की ट्रेनिंग नही दी जाती।  दिल कमज़ोर होता है । कान, आंख और दिमाग बहुत बल शाली होते हैं । 

पीड़ितों के दिल दहल रहे होंगे । योद्धा आड़ में कहीं खड़ा होगा लड़ने के लिए । दुश्मनों से छिपता । या आम लोगों के बीच में अपनी जगह बना लेना ज्यादा मुश्किल तो नही । दो देश लड़ रहे हैं । एक विशाल भीड़ है । लाखों हांथ हैं । एक एलीट क्लास सेना है । जिनके पास हथियार है । 

भीड़ ने आम जन जीवन में इस्तेमाल होने वाले चीजों को हथियार बना लिया । और जख्म में घरलू नुस्खे । इजरायल का गुस्सा समझ आता है । और फिलिस्तीनियों की कैद । पर दोनों तरफ से नृशंस हमले पूरी मानव सभ्यता पर खतरा हैं । युद्ध हमेशा चलनी वाली शै नही है । दोनों (  एक देश है और एक क्षेत्र है ) युद्ध से उभरेंगे । तो त्रासदियों से भरे दिल में कहीं बुद्ध जन्म ले , कहीं गांधी जन्म ले तो कहीं नेल्सन । 

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023

प्रिय नाटककार !



प्रिय नाटककार ,

बड़ी ही नज़ाकत से हम आप की परेशानी को खारिज करते हैं । ऐसी परेशानियां हम सब महसूस करते हैं । मुद्रा राक्षसी हंसी लेकर हम सब को दस्ती रहती है। हम छिपाते हैं । जो छिपाते हैं वही काल बन जाता है । नशा काम का हो तो एक बार समझा जा सकता है । मैने आप की अदाकारी देखी है परदे पर । किरदार को ओढ़ना आप को खूब आता है।  आप देखने में एक दम कभी देवा नंद बन जाते हो तो कभी राजेश खन्ना । कभी गुस्सैल, लड़खड़ाते हुए अमिताभ बच्चन वाला रोल आप के जीवन पर आधारित लगता है । 

आप की आर्थिक इंडेक्स के उतार चढ़ाव वाली कहानी रोचक लगती है । या यूं कहें उतार की चढ़ास बे तलब हो लेती है । बहुत नेक दिल हैं आप । पर आप पर आप का नशा सर चढ़ के बोलने लगता है । तब समस्या नाजायज लगने लगती है । 

आप को तो पता होगा पहले कोरोना फिर युद्ध पे युद्ध । ग्लोबलाइजेशन और डिजिटाइजेशन के इस दौर में हमारी जेबें कैसे न प्रभावित हों । पिछले कुछ महीनों से मुझसे मांगने वालों की तादात बढ़ती जा रही है । कुछ को दिया तो वापस नहीं आया । कुछ को वापस न आने समझ दे दिया। बामुश्किल दाल रोटी कमाने वाला भला कितना देगा । 

आप से असमर्थता जता देने के बाद भी आप की मांग मुझे परेशान कर रही है । और मना करना आप के सम्मान को ठेस पहुंचाना साबित होगा । इसलिए आप के बार बार कॉल करने पर भी फोन नही उठाया जा सका । आशा ही नही पूर्ण विश्वास है । कि अब आप मेरा जवाब समझ गए होंगे । पर मांगने के लिए कल कभी जाता नही कहीं । 

मुझे आश्चर्य होता है । जब कोई कलाकार किसी मॉडल शॉप से अपनी किल्लत की दुहाई दे । घर में रोटी न ले जाने का आफोस जताए । 

आप ही के जुबान से मैने आप की नाकामियों को छिपाने के लिए कई झूठ सुने हैं । उन झूठ पर हंस हंस गुलाटियां खाते देखा है । 

आप के भीतर एक अभिनेता, रोज आप की शामों में जागता होगा । सुबह सफेद करने का संकल्प लेता होगा । लेकिन शाम किसी से एडवांस ली गई रकम के धुएं में राख हो चुकी होती है । सुबह ,  शाम के अफसोस के उतार को तलाशती है । मैं बार बार ये अफसोस जाहिर करना चाहता हूं । कि आप की मदद नही कर सकता । हो सके तो मुझे माफ करिएगा । जब कभी इस पत्र से गुजरे तो । अपनी किसी शाम में मुझे शरीक कीजिएगा । 


आप का शुभचिंतक ।

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...