ठहर कर
एक पल
मादक वसंत
झरने सा
झर झर
बह गया
लहर कर
गाल ऊपर
बाल काले
मोहक छवि
को गढ़ गया
दुबक कर
आंख का
काजल
सुनहरे
मोतियों
में ढल गया
गुलाबी
नर्म होंठों पर
न जाने
कौन सा
किस्सा
अधूरा रह गया
उड़ने दो , उड़ने दो बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए तो भी तो उड़ने दो .. जिस ऊर्जा का संचार प्रवाह हो उद्दंड उसको भी उड़ने दो कह...
1 टिप्पणी:
सुन्दर
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