कुल पेज दृश्य

रविवार, 24 अप्रैल 2022

ख़त !



 तुम्हारे पुराने पते पर

मैंने कई ख़त लिखे

ख़त में तुम्हारा नाम
नही लिखा कभी

न लिखी आपबीती
न भारी समय की व्यथा

क्या लिखता तुम्हे
नए पते पर
जहाँ अब मैं नही रहता

ख़त में लिखी बातें
पते के साथ
अर्थ बदल देती हैं । 

कोई टिप्पणी नहीं:

बच्चों को उड़ने दो ..

 उड़ने दो , उड़ने दो  बच्चों को उड़ने दो ... गर नाक अटक जाए  तो भी तो  उड़ने दो ..   जिस ऊर्जा का  संचार प्रवाह  हो उद्दंड  उसको भी  उड़ने दो  कह...